06/05/2026
"ফান্ড চোর, টিকিট চোর, গাদ্দি ছোড়"
“গদি ছাড়ো, নইলে ছাড়ানো হবে!”
“টিকিট চোরদের কাউন্টডাউন শুরু!”
“আর নয় সহ্য — এবার রাস্তায় নামবে কর্মীরা!”
“দল বাঁচাও, দুর্নীতি হটাও!”
আর নয় ধান্দাবাজি — এবার রাস্তায় নামবে কর্মীরা!
দল বাঁচাও, দুর্নীতি হটাও!
কংগ্রেস বাঁচাতে লড়াই চলবেই!
ভারতের জাতীয় কংগ্রেস জিন্দাবাদ!
বন্দেমাতরম!
জেলা সভাপতি.... ঘরে বসে প্রিয়দার গল্প শুনিয়ে ভোটে জেতা যায় না।
অনেক টেবিল পলিটিক্স করেছেন, এবার বাদ দিন....
নির্বাচনে জয়লাভ করার জন্য সকল কর্মীদের সঙ্গে যোগাযোগ করতে হয়, এলাকার মানুষের সাথে যোগাযোগ করতে হয়, রাস্তায় নেমে সরকারের বিরুদ্ধে আন্দোলন করতে হয়—
এই অপদার্থ জেলা সভাপতির এর মধ্যে কোন কাজটা করেছে?
সারা বছরজুড়ে টাকা ঝেড়ে পকেটে রেখে দেবো—এই চিন্তা ভাবনা নিয়ে তো ভোটে দাঁড়িয়েছে / প্রার্থীদেরকে দাঁড়করিয়েছেন।
পূর্বে কুমড়ো মালাকার কারি কারি টাকা কামিয়েছে দলের নাম করে, এরপর তৃণমূলে পালিয়ে গেছেন।
এখন বর্তমানে যিনি দল পরিচালনা করছেন—
দলের দায়িত্ব নেওয়ার পর থেকে আজ পর্যন্ত তৃণমূল এবং বিজেপির বিরুদ্ধে, কর্পোরেশনে, উত্তর কন্যায়, জেলায়, প্রতিটি ব্লকে, প্রতিটি অঞ্চলে, পঞ্চায়েত গুলিতে, প্রতিটি ওয়ার্ডে কতগুলি আন্দোলন করেছেন?
ছি! লজ্জা হয় না আপনার নিজের ব্যর্থতার জন্য?
ভোটের পূর্বে কিসের ধান্দাবাজির জন্য পদত্যাগের নাটক করা হলো?
ওয়ার্ডে ওয়ার্ড কমিটি নেই কেন?
দলীয় কর্মীদের মর্যাদা দেওয়া হয় না কেন?
একে বাদ দিয়ে, তাকে বাদ দিয়ে জেলায় রাজনীতি হয় না—যেটা হয়, সেটাকে ধান্দাবাজি বলে।
সকাল, বিকাল, রাতে তৃণমূল এবং বিজেপির নেতাদের সাথে এত দোস্তি কিসের স্বার্থে?
বেশি লাফালাফি করলে সমস্ত প্রমাণ বাধ্য হয়ে সোশ্যাল মিডিয়াতে পোস্ট করতে বাধ্য হব, ছবিসহ....
এখনো সময় আছে—
বয়স হয়ে গেছে, বুড়ো হয়ে গেছেন, সম্মানের সাথে বিদায় নিন...
বর্তমানে যিনি সভাপতি আছেন, সে সারা বছর কি কাজ করেছেন!
নোটার বিরুদ্ধে প্রার্থীদেরকে জিতিয়ে আনার জন্য এবং দলীয় টাকা লুঠের জন্য টিকিট চোরদের কে জুতোর মালা পরিয়ে সংবর্ধনা দেওয়া হোক—
জগদীশ ভবনে, বিধান ভবনে এবং প্রতিটি জেলার জেলা কার্যালয়ে।
এরা নির্বাচনী তহবিলের টাকা লুঠ করবার উদ্দেশ্য নিয়েই রাজনীতি করছে।
জেলায় জেলায় কতজন BLO নিয়োগ করা হয়েছিল?
বুথে বুথে নির্বাচনে পোলিং এজেন্ট কোথায় ছিল?
প্রার্থী নির্বাচন করেছেন জেলা সভাপতি...
জেলার সর্বত্র কংগ্রেস প্রার্থীরা নোটার বিরুদ্ধে বিজয় লাভ করাবার কৃতিত্ব জেলা সভাপতির।পঞ্চায়েতের নির্বাচনেও এর থেকে বেশি ভোট প্রায় প্রার্থীরা—এরা দলের কলঙ্ক!
জেলার প্রত্যেক বিধানসভার জন্য AICC র 10 লক্ষ এবং 5 লক্ষ্য আলাদা করে জেলা সভাপতি কে দেওয়া হয়েছে নির্বাচনের খরচ করার জন্য—এত টাকা কোথায় গেল?
কার কার ভাগে কত কত এলো?উত্তর চাই! প্রমাণসহ স্পষ্ট হিসাব চাই!
গোড়ায় গলদ!
সমগ্র পশ্চিমবঙ্গে প্রায় বেশিরভাগ আসনেই এটাই হয়েছে।বিশেষ করে উত্তরবঙ্গের—
দার্জিলিং জেলা, জলপাইগুড়ি জেলা, কোচবিহার জেলা, আলিপুরদুয়ার জেলা, দিনাজপুর জেলা সভাপতিদেরকে জুতোর মালা পরিয়ে সম্বর্ধনা দেওয়া উচিত, তৎসহ আমাদের রাজ্য সভাপতি এবং এই আইসিসি নিযুক্ত দালাল মীরকেসমেত।
সারাবছর জুড়ে এই জেলা সভাপতিরা তৃণমূল এবং বিজেপির সাথে যোগাযোগ রেখে চলে, সেটিং করে চলে।
কংগ্ৰেসের রাজ্য সভাপতি থেকে শুরু করে জেলার নেতা, জেলা সভাপতি এবং টিকিট চোর প্রার্থীরা—জমানত জব্দ!
তারা হয় নিজে থেকে সম্মান নিয়ে পদত্যাগ করবেন কি?
বেশিরভাগ প্রার্থী এবং জেলা সভাপতি টাকা খরচ করেননি।শুধু তৃণমূল-বিজেপির সাথে সেটিং আর ধান্দাবাজি ,নিজের পকেট ভরার রাজনীতি!এই কি কংগ্রেস সভাপতির কাজ?
দলের ভেতরে গণতন্ত্র নেই, তাই সোস্যাল মিডিয়া কে ব্যবহার করতে বাধ্য হলাম। আমাদের মত ছাত্র, যুব, প্রাক্তনীদের লড়াই চলবে।টিকিট চোর... গাদ্দি ছোড়
যারা ব্যর্থ—তারা নিজেরা সরে দাঁড়ান
না হলে কর্মীরাই সরাবে!
কংগ্রেস বাঁচাতে লড়াই চলবেই।
ভারতের জাতীয় কংগ্রেস জিন্দাবাদ।
বন্দেমাতরম।
.....বিনীত....
সাধারণ কংগ্রেস কর্মীবৃন্দ
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“फंड चोर, टिकट चोर, गद्दी छोड़!”
“गद्दी छोड़ो, नहीं तो छुड़ाई जाएगी!” “टिकट चोरों का काउंटडाउन शुरू!” “अब और नहीं सहेंगे — अब कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे!” “पार्टी बचाओ, भ्रष्टाचार हटाओ!”
अब और नहीं धांधली — अब कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे! पार्टी बचाओ, भ्रष्टाचार हटाओ! कांग्रेस को बचाने के लिए लड़ाई जारी रहेगी! भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जिंदाबाद!
वंदेमातरम्!
जिला अध्यक्ष... घर के अंदर बैठकर प्रियदा की कहानियां सुनाकर चुनाव नहीं जीते जाते।
बहुत टेबल पॉलिटिक्स कर ली, अब इसे बंद करें....
चुनाव जीतने के लिए सभी कार्यकर्ताओं से संपर्क करना होता है, क्षेत्र के लोगों के साथ जुड़ना होता है, सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ आंदोलन करना होता है—
इस नाकारा जिला अध्यक्ष ने इनमें से कौन सा काम किया है?
साल भर पैसा इकट्ठा कर अपनी जेब भरने की सोच के साथ ही चुनाव लड़ा गया / उम्मीदवारों को खड़ा किया गया।
पहले कुमरो मालाकार ने पार्टी के नाम पर खूब पैसा कमाया और फिर तृणमूल में भाग गए।
अब जो वर्तमान में पार्टी चला रहे हैं—
जिम्मेदारी लेने के बाद से आज तक तृणमूल और बीजेपी के खिलाफ, निगम में, उत्तरकन्या में, जिले में, हर ब्लॉक में, हर क्षेत्र में, पंचायतों में, हर वार्ड में कितने आंदोलन किए हैं?
छी! अपनी असफलता पर शर्म नहीं आती?
चुनाव से पहले किस धांधली के लिए इस्तीफे का नाटक किया गया?
हर वार्ड में कमेटी क्यों नहीं है?
पार्टी कार्यकर्ताओं को सम्मान क्यों नहीं दिया जाता?
किसी को हटाकर, किसी को दबाकर जिले में राजनीति नहीं चलती—जो हो रहा है, उसे धांधली कहते हैं।
सुबह, शाम, रात—तृणमूल और बीजेपी के नेताओं के साथ इतनी दोस्ती किस स्वार्थ में?
ज्यादा उछल-कूद करेंगे तो मजबूर होकर सारे सबूत सोशल मीडिया पर तस्वीरों के साथ डालने पड़ेंगे....
अभी भी समय है—
उम्र हो गई है, सम्मान के साथ पद छोड़ दें...
वर्तमान अध्यक्ष ने पूरे साल क्या काम किया?
NOTA के खिलाफ उम्मीदवारों को जिताने के नाम पर और पार्टी के पैसे लूटने के लिए टिकट चोरों को जूते की माला पहनाकर सम्मानित किया जाए—
जगदीश भवन, विधान भवन और हर जिले के कार्यालय में।
ये लोग चुनावी फंड लूटने के मकसद से राजनीति कर रहे हैं।
जिले में कितने BLO नियुक्त किए गए थे?
हर बूथ पर पोलिंग एजेंट कहाँ थे?
उम्मीदवारों का चयन जिला अध्यक्ष ने किया...
और पूरे जिले में कांग्रेस उम्मीदवारों का NOTA से हारना—यह जिला अध्यक्ष की “उपलब्धि” है!
पंचायत चुनाव में भी इससे ज्यादा वोट मिलते हैं—ये लोग पार्टी पर कलंक हैं!
हर विधानसभा के लिए AICC से 10 लाख और 5 लाख अलग-अलग जिला अध्यक्ष को चुनाव खर्च के लिए दिए गए—
वो पैसा कहाँ गया?
किसको कितना मिला?
जवाब चाहिए! स्पष्ट हिसाब चाहिए, सबूत के साथ!
शुरुआत से ही गड़बड़ है!
पूरे पश्चिम बंगाल में लगभग यही स्थिति है—
खासकर उत्तर बंगाल में—
दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, अलीपुरद्वार, दिनाजपुर—इन जिलों के अध्यक्षों को जूते की माला पहनाकर सम्मानित किया जाना चाहिए, साथ ही हमारे राज्य अध्यक्ष और AICC के दलालों समेत।
साल भर ये जिला अध्यक्ष तृणमूल और बीजेपी से संपर्क में रहते हैं, सेटिंग करते हैं।
कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष से लेकर जिला नेता, जिला अध्यक्ष और टिकट चोर उम्मीदवार—
सबकी जमानत जब्त!
क्या वे खुद सम्मान के साथ इस्तीफा देंगे?
ज्यादातर उम्मीदवारों और जिला अध्यक्षों ने पैसा खर्च ही नहीं किया—
सिर्फ सेटिंग और अपनी जेब भरने की राजनीति!
क्या यही कांग्रेस अध्यक्ष का काम है?
पार्टी के अंदर लोकतंत्र नहीं है, इसलिए हमें सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ रहा है।
हम जैसे छात्र, युवा और पूर्व कार्यकर्ताओं की लड़ाई जारी रहेगी।
टिकट चोर... गद्दी छोड़!
जो असफल हैं—वे खुद हट जाएं,
नहीं तो कार्यकर्ता हटाएंगे!
कांग्रेस को बचाने की लड़ाई जारी रहेगी।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जिंदाबाद।
वंदे मातरम्।.....विनीत......
साधारण कांग्रेस कार्यकर्तागण