जीवन सारथी

जीवन सारथी जब जीवन का रथ डगमगाए…
तो श्रीकृष्ण बनें आपके सारथी ✨
📖 गीता | भक्ति | आत्मज्ञान
🦚 जीवन सारथी

28/05/2026

एक समय था…
जब हमारे रोने पर पूरा घर परेशान हो जाता था… ❤️
और आज…
माँ-पापा चुपचाप अपनी तकलीफ छुपा लेते हैं… 💔
हम चाहे कितने भी बड़े हो जाएँ,
उनके लिए हमेशा बच्चे ही रहेंगे… 🥺
अगर आपके माता-पिता आपके साथ हैं,
तो उनके साथ थोड़ा समय ज़रूर बिताइए… 🙏❤️”

“कोई कभी सच में मरता नहीं… आत्माएँ हमेशा जीवित रहती हैं 💔🕉️”कभी आपने महसूस किया है…कि किसी अपने के चले जाने के बाद भीउसक...
16/05/2026

“कोई कभी सच में मरता नहीं… आत्माएँ हमेशा जीवित रहती हैं 💔🕉️”

कभी आपने महसूस किया है…
कि किसी अपने के चले जाने के बाद भी
उसकी आवाज़ कानों में गूंजती रहती है…?
उसकी बातें याद आती रहती हैं…
और अचानक आँखें भर आती हैं…।
क्योंकि रिश्ते शरीर से नहीं…
आत्मा से जुड़े होते हैं…।
श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था —
“जिसे तुम मृत्यु समझकर रो रहे हो,
वह अंत नहीं…
सिर्फ एक परिवर्तन है…”।
जिस माँ ने बचपन में उंगली पकड़कर चलना सिखाया…
जिस पिता ने अपनी खुशियाँ त्यागकर हमें बड़ा किया…
जिस अपने ने हर दर्द में साथ दिया…
वे लोग कभी सच में हमसे दूर नहीं जाते…
वे हमारी यादों, संस्कारों और आत्मा में हमेशा जीवित रहते हैं…।
हम इंसान शरीर से प्यार करने लगते हैं…
इसलिए मृत्यु हमें बिछड़ना लगती है…
लेकिन आत्माएँ कभी नहीं मरतीं…
वे सिर्फ एक यात्रा से दूसरी यात्रा पर चली जाती हैं…।
एक दिन यह शरीर मिट्टी बन जाएगा…
नाम भी धीरे-धीरे खो जाएगा…
लेकिन हमारे कर्म, हमारा प्रेम और हमारी आत्मा…
समय से भी आगे जीवित रहेंगे…।
इसीलिए श्रीकृष्ण कहते हैं —
घमंड मत करो इस शरीर का…
और टूटो मत किसी के जाने पर…
क्योंकि जो सच में अपना होता है,
वो कभी पूरी तरह खोता नहीं…।
🙏
कभी-कभी रात में जो अपने याद आकर रुला देते हैं…
शायद वो कहीं न कहीं
आज भी हमारी आत्मा के बहुत करीब होते हैं…। 🕉️💔
#श्रीकृष्ण
#गीता_ज्ञान
#सनातन_धर्म
#आत्मा



“शराब सिर्फ इंसान नहीं… पूरा परिवार बर्बाद करती है 💔”एक घर में सुबहअगरबत्ती की खुशबू भी उठती है…और उसी घर में रात को शरा...
15/05/2026

“शराब सिर्फ इंसान नहीं… पूरा परिवार बर्बाद करती है 💔”
एक घर में सुबह
अगरबत्ती की खुशबू भी उठती है…
और उसी घर में रात को शराब की बदबू भी…
तो समझ लीजिए,
उस घर में सिर्फ दो आदतें नहीं टकरा रहीं…
पूरा भविष्य लड़ रहा है…।
एक औरत मंदिर जाती है…
भगवान से सिर्फ इतना माँगती है कि
“मेरा परिवार बचा रहे…”
वो व्रत रखती है, पूजा करती है,
बच्चों के लिए सपने देखती है…
लेकिन जब घर का पुरुष शराब को अपना सहारा बना लेता है,
तो उसकी हर प्रार्थना धीरे-धीरे टूटने लगती है…।
शराब पीने वाला आदमी
सिर्फ पैसे नहीं उड़ाता…
वो अपने बच्चों का बचपन छीन लेता है…
पत्नी की आँखों की नींद छीन लेता है…
माँ की मुस्कान छीन लेता है…
और पिता का सिर समाज में झुका देता है…।
बच्चे बाहर से चाहे कुछ न कहें…
लेकिन अंदर ही अंदर डरते रहते हैं…
कि आज घर में फिर लड़ाई होगी…
फिर माँ रोएगी…
फिर पापा बदलने का वादा करेंगे…
और फिर सब पहले जैसा हो जाएगा…।
याद रखिए…
शराब की बोतल कभी अकेले इंसान को खत्म नहीं करती…
उसके साथ पूरे परिवार की खुशियाँ धीरे-धीरे खत्म होती हैं…।
जिस घर में
मंदिर की घंटियाँ कम
और शराब की बोतलों की आवाज़ ज्यादा सुनाई देने लगे…
वहाँ सुख, शांति और सम्मान टिक नहीं पाते…।
🙏
अगर सच में परिवार से प्यार है…
तो बच्चों के भविष्य को शराब में मत डुबोइए…
क्योंकि एक पिता की आदत…
पूरे घर की किस्मत बदल देती है।
#नशामुक्तभारत
#शराब_छोड़ो
#जीवनसारथी

काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः।महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम्॥ (गीता 3.37)अर्जुन पूछते हैं:“मनुष्य जानते हुए भी ग...
11/05/2026

काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः।
महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम्॥ (गीता 3.37)
अर्जुन पूछते हैं:
“मनुष्य जानते हुए भी गलत काम क्यों कर बैठता है?”
तब श्रीकृष्ण उत्तर देते हैं:
“उसका सबसे बड़ा कारण है — अनियंत्रित इच्छा।”
“काम” सिर्फ वासना नहीं है
यहाँ “काम” का अर्थ है:
किसी चीज़ को पाने की तीव्र चाह
“बस यही चाहिए” वाली जिद
मन की ऐसी भूख जो शांत नहीं होती
यह किसी भी रूप में हो सकती है:
पैसा
नाम
शरीर
attention
जीत
social media addiction
किसी इंसान का obsession
इच्छा कैसे क्रोध बनती है?
गीता मनोविज्ञान समझाती है:
चरण 1 — मन बार-बार सोचता है
“काश मुझे यह मिल जाए…”
चरण 2 — आसक्ति बनती है
“अब इसके बिना नहीं रह सकता।”
चरण 3 — इच्छा पैदा होती है
“मुझे यह हर हाल में चाहिए।”
चरण 4 — रुकावट आती है
और वहीं से जन्म लेता है —
गुस्सा
frustration
jealousy
hatred
इसलिए कृष्ण कहते हैं:
“काम ही आगे चलकर क्रोध बनता है।”
“महाशनः” — कभी न भरने वाली आग
इच्छा की सबसे बड़ी समस्या यह है कि:
यह पूरी होकर खत्म नहीं होती,
बल्कि और बड़ी हो जाती है।
जैसे:
एक सफलता → फिर दूसरी चाहिए
एक खुशी → फिर उससे ज्यादा चाहिए
एक जीत → फिर और जीत चाहिए
इसलिए गीता इसे आग की तरह बताती है।
गीता इच्छाओं को गलत नहीं कहती
गीता यह नहीं कहती कि:
सपने मत देखो,
लक्ष्य मत बनाओ,
जीवन छोड़ दो।
बल्कि गीता कहती है:
“इच्छा तुम्हारे नियंत्रण में होनी चाहिए, तुम इच्छा के नियंत्रण में नहीं।”
सबसे गहरा संदेश
जब मन किसी चीज़ का गुलाम बन जाता है, तब इंसान:
अपनी शांति खो देता है,
सही-गलत का विवेक खो देता है,
और बाहर की चीज़ों में खुशी ढूँढने लगता है।
लेकिन असली स्वतंत्रता तब आती है, जब इंसान चाहे तो भी अपने मन को रोक सके।
आधुनिक जीवन में यह श्लोक
आज यह श्लोक पहले से ज्यादा relevant है:
social media craving
instant pleasure
comparison
validation की भूख
uncontrolled desires
इन सबका root वही है जिसे गीता “काम” कहती है।
निष्कर्ष
गीता का संदेश repression नहीं, mastery है।
इच्छा रखो…
लेकिन इच्छा तुम्हें नियंत्रित न करे।
वरना वही इच्छा, क्रोध, बेचैनी और दुख का कारण बन जाती है।

11/05/2026

“कभी-कभी इंसान रोता नहीं…
बस अंदर ही अंदर खत्म होता रहता है…
सबको लगता है वो ठीक है…
क्योंकि उसने शिकायत करना छोड़ दिया होता है।
जो सबसे ज्यादा हँसते हैं ना…
अक्सर वही सबसे ज्यादा दर्द छुपाते हैं।
कुछ लोग थक जाते हैं…
अपना दर्द समझाते-समझाते…
फिर वो चुप रहना सीख जाते हैं।
और एक दिन…
उनकी खामोशी ही बता देती है…
कि वो पहले जैसे नहीं रहे… 💔”
#जीवन_सारथी 💔

06/12/2021

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