Ek premma ch chaha

Ek premma ch chaha chay ek sukun hai or vh sukun mai de sakta hun

भट्ठी की तलब कोई अंगार से पूछे,टपरी की आशिक़ी हैरान थोड़ी है...कड़क चाय की तासीर कोई तलबगार से पूछे,रूह से मोहब्बत करना ...
29/05/2024

भट्ठी की तलब कोई अंगार से पूछे,
टपरी की आशिक़ी हैरान थोड़ी है...
कड़क चाय की तासीर कोई तलबगार से पूछे,
रूह से मोहब्बत करना आसान थोड़ी है।

25/04/2024

नौकरी की लाइन में लगना है या राशन की लाइन में लगना है
तय आप करेंगे ।
# #लोकसभा चुनाव 2024

इनके साथ Dhruv Rathee – मुझे अभी-अभी इनका एक टॉप फ़ैन होने की पहचान मिली है! 🎉
25/04/2024

इनके साथ Dhruv Rathee – मुझे अभी-अभी इनका एक टॉप फ़ैन होने की पहचान मिली है! 🎉

14/04/2024

छिंदवाड़ा जिले के तमाम अंबेडकरवादी और बुद्ध प्रेमी तमाम साथियों से के लिए एक इंपॉर्टेंट संदेश है आज डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर जी का जन्मदिन है 14 अप्रैल इसके उपलक्ष्य में क्षमता बौद्ध विहार के माध्यम से जो रैली निकाले जाने वाली रहती है वह सुबह ना होकर शाम के 4:00 बजे निकल जाएगी यह परासिया रोड समता बौद्ध विहार से प्रारंभ होकर छिंदवाड़ा जिले के समस्त विभिन्न चौक समस्त स्थलों से होकर गुजरेगी जिसमें तमाम साथियों से मेरी यही अपील है कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अंबेडकर मूवमेंट का जश्न मनाने के लिए शामिल हो जाइए

कोहली ने आज मैच के बाद TV पर कहा "वह (सचिन तेंदुलकर) क्रिकेट के भगवान हैं। उन्हें देखकर ही मैंने खेलना शुरू किया। कभी नह...
17/11/2023

कोहली ने आज मैच के बाद TV पर कहा

"वह (सचिन तेंदुलकर) क्रिकेट के भगवान हैं। उन्हें देखकर ही मैंने खेलना शुरू किया। कभी नहीं सोचा था उनके इतने रिकार्ड में से एक रिकार्ड के पास आ पाऊंगा। पर उनसे मेरी तुलना बेईमानी है। आप एक ऐसे इंसान से मेरी तुलना कर रहे हो जिसे देखकर मैंने खेलना शुरू किया। जिन्होंने हमेशा मुझे शुरू के दिनों में गाइड किया। वह बल्लेबाजी में perfection की सीमा से परे थे। आप तुलना नहीं कर सकते। उनके समय ढकी हुई पिचें हुआ करती थीं, क्रिकेट रूलस और गेंदबाजी दोनों काफी अलग थे और तब गेंदबाज 4 की औसत से रन दिया करते थे और एक one day में कुल मिलाकर भी बहुत बार 400 नहीं बनता था जो आज एक innings में बनता है, वह बहुत महान हैं"।

कोहली का यही down to earth attitude आज उन्हें यहां तक लाया है। कोहली सचिन के जिस दौर की बात कर रहे हैं उस समय one day में 15 ओवर का ही फील्डिंग restriction होता था जो अब पूरे मैच में रहता है। 20 आवर का power play जैसा कोई rule नहीं था। ना ही दो नई गेंदे हुआ करती थीं। DRS नहीं था। ना जाने कितनी बार steve bucknor जैसे अम्पायर्स ने सचिन को गलत out दिया।

उस समय के गेंदबाजों पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलिया के पास मैकग्राथ, ब्रेट ली, गिल्सपी, कासप्रोविच, शेन वार्न
पाकिस्तान के पास वसीम, वकार, अख्तर, रज्जाक, स्क्लैन, मुश्ताक, श्रीलंका के पास वास, मुरली,
दक्षिण अफ्रीका के पास पोलक, डोनाल्ड, क्लूजनर, कैलिस, स्टेयन न्यूजीलैंड के पास बांड, वेटोरी, क्रिस केयर्ंस, वेस्टइंडीज के पास वाल्श, एंब्रोस और यहां तक जिम्बावे के पास हीथ स्ट्रीक, ओलंगा, नील जानसन जैसे गेंदबाज थे। सचिन के पास nets में कभी भी इनकी बराबरी का कोई bowler ना था practice करने के लिए। ना भारत का बोर्ड तब bowling machines खरीद सकने की आर्थिक हालत में था।

भारत के पास अजरूदीन, नयन मोंगिया, अजय जडेजा जैसे मैच फिक्सर थे। सारा बोझ अकेले सचिन पर होता था। सचिन रन भी बनाए। पारी की शुरवात भी करे और मैच भी खतम कर कर दे नहीं तो हार जायेंगे। याद आता है चेन्नई का वो मैच जब पाकिस्तान के खिलाफ 16 रन चाहिए थी और सचिन कुछ 150 बनाकर आउट हुए और 6 विकेट बाकी थीं। टीम 12 रन से टैस्ट मैच हार गई।

वह दौर अलग था। उस समय ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, इंग्लैंड के बोर्ड्स पर अधिक पैसा था। वह खिलाड़ियों पर हमसे अधिक invest करते थे। उनकी ट्रेनिंग भी उसी लेवल पर थी। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, अफ्रीका स्पोर्ट्स साइंस को अपना चुके थे।

ऐसे हालातों में सचिन ने भारत में अपने दम पर क्रिकेट को खड़ा किया। सचिन की महानता उनके रिकार्ड या रन से नहीं बल्कि क्रिकेट का globalization और commercialization करने से है। वह विश्व क्रिकेट के पहले global super star थे जिन्हें देखने लोग हजारों की फ्लाइट पकड़ कर और हजारों का टिकट लेकर मैच देखने पहुंचा करते थे। इन्होंने क्रिकेट को football की तरह brands से जोड़ा। क्रिकेट में आया पैसा सचिन की वजह से ही है जिससे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट आज फल फूल रहा है और ICC और BCCI के पास sponsers हैं।

आज फुटबाल की दुनिया में मैसी हैं । पहले माराडोना थे। उनके देश में लोग मैसी और माराडोना दोनों का सम्मान करते हैं। माराडोना ने वहां फुटबाल को जीवंत किया। मैसी ने उसे नई उड़ान दी। भारत की क्रिकेट में माराडोना वाला काम सचिन ने किया। और फिर गांगुली, धोनी, रोहित, कोहली उसे नई पहचान देते चले गए।

किसी भी इंजेमांम, लारा या पोंटिंग के लिए सर डॉन ब्रैडमैन ने नहीं कहा की यह मेरी तरह खेलता है सिर्फ सचिन के लिए कहा था। इसलिए सचिन सिर्फ एक है। एक ही रहेंगे। सचिन ने जो बाग बनाया था वहां धोनी, रोहित, कोहली जैसे फूल खिलते रहेंगे हर युग में। पूरी उम्मीद है की कोहली सचिन के 100 शतक के रिकार्ड को भी तोड़ेंगे।

16/10/2023

# # # professional chaywala

16/10/2023

# # professional chaywala

Chay se shuru.....
07/08/2023

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08/08/2022
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22/01/2022

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