19/01/2026
सुबह से लेकर रात तक की ये किचन वाली दौड़,
यही हमारी दुनिया, यही हमारा दौर।
घंटों तपिश सहकर भी हम मुस्कुराना जानते हैं,
क्योंकि दूसरों को खिलाना, यही अपना फर्ज़ मानते हैं।
थकावट आती है, नींद कभी कम हो जाती है,
पर प्लेट पर मुस्कान उतरते ही हर मेहनत सफल हो जाती है।