12/02/2026
बहुत समय पहले की बात है। नीले, शांत समुद्र के किनारे एक बड़ा हरा-भरा पेड़ खड़ा था। वह पेड़ समुद्र की लहरों को हर दिन आते-जाते देखता और सोचता, “काश मैं भी समुद्र के अंदर की दुनिया देख पाता।”
समुद्र के अंदर एक सुंदर जलपरी रहती थी। उसके लंबे सुनहरे बाल थे और उसकी पूंछ चमकती थी। वह रोज़ किनारे के पास आकर उस पेड़ को देखा करती। पेड़ की हरी पत्तियाँ उसे बहुत अच्छी लगती थीं।
एक दिन जलपरी ने समुद्र से कहा,
“समुद्र देव, क्या मैं उस पेड़ से दोस्ती कर सकती हूँ?”
समुद्र ने मुस्कुराते हुए लहरों को धीरे-धीरे किनारे तक भेजा। लहरों ने पेड़ की जड़ों को छुआ और संदेश दिया,
“जलपरी तुमसे दोस्ती करना चाहती है।”
पेड़ बहुत खुश हुआ। उसने अपनी डालियाँ हवा में हिलाईं और कहा,
“मैं भी उससे दोस्ती करना चाहता हूँ।”
उस दिन से जलपरी रोज़ किनारे आकर पेड़ से बातें करती। वह उसे समुद्र के अंदर की रंग-बिरंगी मछलियों और मोतियों की कहानी सुनाती। पेड़ उसे आकाश में उड़ते पक्षियों और बदलते मौसम की बातें बताता।
एक दिन तेज़ तूफ़ान आया। समुद्र की लहरें बहुत ऊँची हो गईं। जलपरी डर गई। पेड़ ने अपनी मजबूत जड़ों से ज़मीन को थामे रखा और कहा,
“डरो मत, सब ठीक हो जाएगा।”
तूफ़ान शांत हुआ। जलपरी ने मुस्कुराकर कहा,
“सच्ची दोस्ती हमेशा साथ देती है।”
उस दिन से पेड़, समुद्र और जलपरी तीनों अच्छे मित्र बन गए।