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सुपर ज़िद्दी एंटरप्राइज़ेस में भर्ती – तुरंत जॉइन करें!हमारी टीम का विस्तार हो रहा है, और हम पटना, बिहार में तुरंत नियुक...
16/03/2025

सुपर ज़िद्दी एंटरप्राइज़ेस में भर्ती – तुरंत जॉइन करें!

हमारी टीम का विस्तार हो रहा है, और हम पटना, बिहार में तुरंत नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों की तलाश कर रहे हैं:

1️⃣ सेल्स एक्जीक्यूटिव – 4 पद

योग्यता: कोई निर्धारित सीमा नहीं

वेतनमान: ₹0–2 लाख प्रति वर्ष (इंटरव्यू के आधार पर)

2️⃣ डिलीवरी एक्जीक्यूटिव – 7 पद

योग्यता: कोई निर्धारित सीमा नहीं

वेतनमान: ₹0–2 लाख प्रति वर्ष (इंटरव्यू के आधार पर)

📩 आवेदन कैसे करें?
इच्छुक उम्मीदवार अपना बायोडाटा [email protected] पर भेजें।

जल्दी करें! यह सुनहरा अवसर हाथ से न जाने दें!

07/03/2025

यह संदेश पुरुषों के लिए एक चेतावनी है कि वे अपनी नौकरी और आय के स्रोत की सुरक्षा को प्राथमिकता दें, क्योंकि यह न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन बल्कि उनके विवाह और पारिवारिक जीवन पर भी गहरा प्रभाव डालता है। पोस्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि एक पुरुष की आर्थिक स्थिति उसकी पत्नी के प्रति सम्मान और आदर को प्रभावित करती है। जब एक पुरुष अपनी नौकरी खोता है और आर्थिक रूप से अपने परिवार की ज़िम्मेदारी नहीं निभा पाता, तो पत्नी का व्यवहार धीरे-धीरे बदलता है। इसे चार चरणों में बताया गया है:
1. सहानुभूति का चरण (Sympathetic Stage):
जब एक पुरुष अपनी नौकरी खोता है, तो शुरुआत में पत्नी उसकी स्थिति के प्रति सहानुभूति और सहानुभूति महसूस करती है। वह यह समझती है कि पहले तक उसने घर में सभी आवश्यकताओं को पूरा किया था और घर की स्थिति स्थिर रखी थी। यदि वह कामकाजी महिला है, तो वह अपनी भूमिका को निभाना शुरू करती है, घर के कामों को संभालती है, और पति को भावनात्मक और मानसिक समर्थन देती है। हालांकि, भीतर ही भीतर वह एक समय सीमा तय कर चुकी होती है, ताकि पति जल्दी से कोई नई नौकरी ढूंढे और घर की जिम्मेदारी फिर से उठाए। यदि पुरुष इस समय सीमा के भीतर एक नई नौकरी प्राप्त कर लेता है, तो पत्नी उसे एक देवदूत की तरह मानने लगती है। लेकिन अगर वह असफल रहता है, तो स्थिति बदलने लगती है।
2. चिढ़ने का चरण (Annoying Stage):
इस चरण में, पत्नी को हर छोटी बात में पति की हरकतें चिढ़ने लगती हैं। वह किसी भी काम को ठीक से नहीं करती और घर के छोटे-मोटे कामों पर भी उसकी नाराजगी बढ़ने लगती है। उदाहरण के लिए, वह पति को यह तक बताने लगेगी कि वह टूथपेस्ट किस तरह से प्रेस कर रहा है, या गीला तौलिया दरवाजे पर क्यों लटका रखा है। यह समय ऐसा होता है जब वह चुपचाप नाराजगी दिखाती है, और पति को यह नहीं पता होता कि वह नाराज क्यों हैं। वह न तो खुलकर बात करती है और न ही उन चीजों पर पहले की तरह ध्यान देती है। इसके साथ ही, उसका सम्मान भी घटने लगता है। यदि इस दौरान पति को नौकरी नहीं मिलती, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
3. चिढ़ने का अधिक तीव्र चरण (Irritating Stage):
अब, पत्नी का व्यवहार और अधिक चिढ़ने वाला और तर्कपूर्ण हो जाता है। उसका प्यार नफरत में बदलने लगता है। इस समय, वह छोटी-छोटी बातों पर पति से बहस करने लगती है। वह अपने पति को दूसरों से तुलना करने लगती है, यह बताते हुए कि अन्य लोग जो उनकी तरह नौकरी खो चुके हैं, अब एक नई नौकरी पा चुके हैं। इसके अलावा, वह शारीरिक संबंधों से दूर रहने लगती है, और पति के प्रति आकर्षण और स्नेह खत्म हो जाता है। वह घर के कामों से भी बचने लगती है और कुछ अधिकारों से पति को वंचित करने लगती है। यदि इस दौरान भी पुरुष को नौकरी नहीं मिलती, तो स्थिति और जटिल हो सकती है।
4. निराशाजनक चरण (Frustrating Stage):
इस चरण में, पत्नी पूरी तरह से निराश हो जाती है और अब वह शादी को बचाने में रुचि नहीं रखती। वह या तो पति से कहेगी कि वह घर छोड़ दे, या फिर वह खुद घर से बाहर चली जाएगी। घर में माहौल युद्ध जैसा हो जाता है। वह दूसरे पुरुषों के साथ रिश्ते बनाने में भी संकोच नहीं करती और अपने पति को एक बुरा और भाग्यहीन व्यक्ति मानने लगती है। इस अवस्था में, उसकी सहनशीलता समाप्त हो जाती है और वह अब पति के साथ रहने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाती है।
निष्कर्ष:
पोस्ट का संदेश यह है कि एक पुरुष को अपनी नौकरी और आय के स्रोत की सुरक्षा करनी चाहिए। यदि वह अपनी ज़िंदगी और रिश्ते में शांति, खुशी और सफलता चाहता है, तो उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि वह परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी को सही तरीके से निभा सके। अगर कोई नौकरी नहीं मिल रही है, तो उसे किसी छोटे-मोटे काम की तलाश करनी चाहिए जो उसे रोज़ाना घर से बाहर ले जाए और उसकी प्रतिष्ठा को बनाए रखे। किसी भी काम को छोटा या शर्मनाक नहीं मानना चाहिए, बशर्ते वह काम ईमानदारी से किया जाए और परिवार की जरूरतों को पूरा करता हो।

06/06/2024
14/03/2024

"If anyone want job then please contact us"
"अगर किसी को नौकरी चाहिए तो कृपया हमसे संपर्क करें"
[email protected]

08/07/2023

मानवशरीर में सप्तचक्रों का प्रभाव ☀️

1. मूलाधारचक्र : ☀️
यह शरीर का पहला चक्र है। गुदा और लिंग के बीच 4 पंखुरियों वाला यह 'आधार चक्र' है। 99.9% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं। जिनके जीवन में भोग, संभोग और निद्रा की प्रधानता है उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है।

मंत्र : लं
चक्र जगाने की विधि : मनुष्य तब तक पशुवत है, जब तक कि वह इस चक्र में जी रहा है इसीलिए भोग, निद्रा और संभोग पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है- यम और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव में रहना।

प्रभाव : इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतर वीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जाग्रत हो जाता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीरता, निर्भीकता और जागरूकता का होना जरूरी है।

2. स्वाधिष्ठानचक्र- ☀️

यह वह चक्र है, जो लिंग मूल से 4 अंगुल ऊपर स्थित है जिसकी 6 पंखुरियां हैं। अगर आपकी ऊर्जा इस चक्र पर ही एकत्रित है तो आपके जीवन में आमोद-प्रमोद, मनोरंजन, घूमना-फिरना और मौज-मस्ती करने की प्रधानता रहेगी। यह सब करते हुए ही आपका जीवन कब व्यतीत हो जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा और हाथ फिर भी खाली रह जाएंगे।

मंत्र : वं

कैसे जाग्रत करें : जीवन में मनोरंजन जरूरी है, लेकिन मनोरंजन की आदत नहीं। मनोरंजन भी व्यक्ति की चेतना को बेहोशी में धकेलता है। फिल्म सच्ची नहीं होती लेकिन उससे जुड़कर आप जो अनुभव करते हैं वह आपके बेहोश जीवन जीने का प्रमाण है। नाटक और मनोरंजन सच नहीं होते।

प्रभाव : इसके जाग्रत होने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश

होता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि उक्त सारे दुर्गुण समाप्त हों तभी सिद्धियां आपका द्वार खटखटाएंगी।

3. मणिपुरचक्र : ☀️

नाभि के मूल में स्थित यह शरीर के अंतर्गत मणिपुर नामक तीसरा चक्र है, जो 10 कमल पंखुरियों से युक्त है। जिस व्यक्ति की चेतना या ऊर्जा यहां एकत्रित है उसे काम करने की धुन-सी रहती है। ऐसे लोगों को कर्मयोगी कहते हैं। ये लोग दुनिया का हर कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं।

मंत्र : रं

कैसे जाग्रत करें : आपके कार्य को सकारात्मक आयाम देने के लिए इस चक्र पर ध्यान लगाएंगे। पेट से श्वास लें।
प्रभाव : इसके सक्रिय होने से तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह आदि कषाय-कल्मष दूर हो जाते हैं। यह चक्र मूल रूप से आत्मशक्ति प्रदान करता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए आत्मवान होना जरूरी है। आत्मवान होने के लिए यह अनुभव करना जरूरी है कि आप शरीर नहीं, आत्मा हैं।

आत्मशक्ति, आत्मबल और आत्मसम्मान के साथ जीवन का कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं।

4. अनाहतचक्र- ☀️

हृदयस्थल में स्थित द्वादश दल कमल की पंखुड़ियों से युक्त द्वादश स्वर्णाक्षरों से सुशोभित चक्र ही अनाहत चक्र है। अगर आपकी ऊर्जा अनाहत में सक्रिय है तो आप एक सृजनशील व्यक्ति होंगे। हर क्षण आप कुछ न कुछ नया रचने की सोचते हैं। आप चित्रकार, कवि, कहानीकार, इंजीनियर आदि हो सकते हैं।

मंत्र : यं

कैसे जाग्रत करें : हृदय पर संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। खासकर रात्रि को सोने से पूर्व इस चक्र पर ध्यान लगाने से यह अभ्यास से जाग्रत होने लगता है और सुषुम्ना इस चक्र को भेदकर ऊपर गमन करने लगती है।

प्रभाव : इसके सक्रिय होने पर लिप्सा, कपट, हिंसा, कुतर्क, चिंता, मोह, दंभ, अविवेक और अहंकार समाप्त हो जाते हैं। इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम और संवेदना का जागरण होता है। इसके जाग्रत होने पर व्यक्ति के समय ज्ञान स्वत: ही प्रकट होने लगता है। व्यक्ति अत्यंत आत्मविश्वस्त, सुरक्षित, चारित्रिक रूप से जिम्मेदार एवं भावनात्मक रूप से संतुलित व्यक्तित्व बन जाता है। ऐसा व्यक्ति अत्यंत हितैषी एवं बिना किसी स्वार्थ के मानवता प्रेमी एवं सर्वप्रिय बन जाता है।

5. विशुद्धचक्र-

कंठ में सरस्वती का स्थान है, जहां विशुद्ध चक्र है और जो 16 पंखुरियों वाला है। सामान्य तौर पर यदि आपकी ऊर्जा इस चक्र के आसपास एकत्रित है तो आप अति शक्तिशाली होंगे।

मंत्र : हं

कैसे जाग्रत करें : कंठ में संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।

प्रभाव : इसके जाग्रत होने कर 16 कलाओं और 16 विभूतियों का ज्ञान हो जाता है। इसके जाग्रत होने से जहां भूख और प्यास को रोका जा सकता है वहीं मौसम के प्रभाव को भी रोका जा सकता है।

6. आज्ञाचक्र : ☀️

भ्रूमध्य (दोनों आंखों के बीच भृकुटी में) में आज्ञा चक्र है। सामान्यतौर पर जिस व्यक्ति की ऊर्जा यहां ज्यादा सक्रिय है तो ऐसा व्यक्ति बौद्धिक रूप से संपन्न, संवेदनशील और तेज दिमाग का बन जाता है लेकिन वह सब कुछ जानने के बावजूद मौन रहता है। इसे बौद्धिक सिद्धि कहते हैं।

मंत्र : उ

कैसे जाग्रत करें : भृकुटी के मध्य ध्यान लगाते हुए साक्षी भाव में रहने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।

प्रभाव : यहां अपार शक्तियां और सिद्धियां निवास करती हैं। इस आज्ञा चक्र का जागरण होने से ये सभी शक्तियां जाग पड़ती हैं और व्यक्ति सिद्धपुरुष बन जाता है।

7. सहस्रारचक्र :

सहस्रार की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है अर्थात जहां चोटी रखते हैं। यदि व्यक्ति यम, नियम का पालन करते हुए यहां तक पहुंच गया है तो वह आनंदमय शरीर में स्थित हो गया है। ऐसे व्यक्ति को संसार, संन्यास और सिद्धियों से कोई मतलब नहीं रहता है।

मंत्र : ॐ

कैसे जाग्रत करें : मूलाधार से होते हुए ही सहस्रार तक पहुंचा जा सकता है। लगातार ध्यान करते रहने से यह चक्र जाग्रत हो जाता है और व्यक्ति परमहंस के पद को प्राप्त कर लेता है।

प्रभाव : शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण विद्युतीय और जैवीय विद्युत का संग्रह है। यही मोक्ष का द्वार है।

ॐ नमः शिवाय ॐ
🌺🌺🌺🌺🌺
🙏🙏🙏🙏🙏
🚩

08/07/2023

कुबेर के रत्न
🌹🌹🌹🌹

एक साधु प्रत्येक घर के सामने खड़ा होकर पुकारता।
माई! मुठ्ठी भर मोती देना.. ईश्वर, तुम्हारा कल्याण करेगा.. भला करेगा।'

साधु की यह विचित्र माँग सुनकर स्त्रियाँ चकित हो उठती थीं। वे कहती थीं - 'बाबा! यहाँ तो पेट भरने के लाले पड़े हैं। तुम्हें इतने ढेर सारे मोती कहाँ से दे सकेंगे। आगे बढ़ो...।'

साधु को खाली हाथ, गाँव छोड़ता देख एक बुढ़िया को उस पर दया आई। बुढ़िया ने साधु को पास बुलाया।
उसकी हथेली पर एक नन्हा सा मोती रखकर वह बोली:- साधु महाराज! मेरे पास अंजुलि भर मोती तो नहीं हैं। नाक की नथनी टूटी, तो यह एक मोती मिला है। मैंने इसे संभालकर रखा था। यह मोती ले लो। हमारे गाँव से, खाली हाथ मत जाना।'

बुढ़िया के हाथ का नन्हा सा मोती देखकर साधु हँसने लगा।
उसने कहा, 'माई ! यह छोटा मोती मैं अपनी फटी हुई झोली में कहाँ रखूँ? इसे आप अपने ही पास रखना।'

ऐसा कहकर साधु उस गाँव के बाहर निकल पड़ा। दूसरे गाँव में आकर साधु प्रत्येक घर के सामने खड़ा होकर पुनः पुकारने लगा..!

उस गाँव के एक छोर में किसान का घर था। वहाँ मोती माँगने की चाह उसे घर के सामने ले गई।
भैया ! प्याली भर मोती देना.. ईश्वर, तुम्हारा भला करेगा। साधु ने पुकार लगाई।

किसान बाहर आया। ‍उसने साधु के लिए आंगन में चादर बिछाई और साधु से विनती की,कि....!
साधु महाराज, पधारिए...

किसान ने साधु को प्रणाम किया और मुड़कर पत्नी को आवाज दी..!
लक्ष्मी, बाहर साधु जी आए हैं। इनके दर्शन कर लो। किसान की पत्नी तुरंत बाहर आई। उसने साधुजी के पाँव धोकर दर्शन किए।

किसान ने कहा- 'देख लक्ष्मी; साधुजी बहुत भूखे हैं। इनके भोजन की तुरंत व्यवस्था करना।
अंजुलि भर मोती लेकर पीसना, और उसकी रोटियाँ बनाना। तब तक मैं मोतियों की गागर लेकर आता हूँ।' ऐसा कहकर वह किसान खाली गागर लेकर घर के बाहर निकला।

कुछ समय पश्चात किसान लौट आया। तब तक लक्ष्मी ने भोजन बनाकर तैयार कर रखा था।

साधु ने पेट भर भोजन किया। वह प्रसन्न हुआ। उसने हँसकर किसान से कहा... 'बहुत दिनों बाद कुबेर के घर का भोजन मिला है। मैं बहुत प्रसन्न हूँ।

अब तुम्हारी याद आती रहे, इसलिए मुझे कान भर मोती देना। मैं तुम दंपति को सदैव याद करूँगा।
उस पर किसान ने हँसकर कहा - 'साधु महाराज! मैं अनपढ़ किसान, आपको कान भर मोती कैसे दे सकता हूँ ?
आप ज्ञान संपन्न हैं। इस कारण "हम" दोनों आपसे कान भर मोतियों की अपेक्षा रखते हैं।'

साधु ने आँखें बन्द कर कहा - 'नहीं किसान राजा, तुम अनपढ़ नहीं हो। तुम तो विद्वान हो। इस कारण तुम मेरी इच्छा पूरी करने में सक्षम रहे।

जब तुम जैसा कोई कुबेर भंडारी मिल जाता है तो मै, पेट भरकर भोजन कर लेता हूँ।
साधु ने, किसान की ओर देखा और कहा- "जो फसल के दानों, पानी की बूँदों और उपदेश के शब्दों को मोती समझता है। वही मेरी दृष्टि से सच्चा कुबेर है।

मैं वहाँ पेट भरकर भोजन करता हूँ। फिर वह भोजन दाल-रोटी हो या चटनी रोटी। प्रसन्नता का नमक उसमें स्वाद भर देता है।

किसान दंपत्ति को आशीर्वाद देकर साधु महाराज आगे चल पड़े ।
पृथ्वी पर तीन ही रत्न हैं। जल, अन्न और सुभाषित। मूर्ख लोग ही पत्थर के टुकड़ों हीरे, मोती माणिक्य आदि को रत्न कहते हैं।

शुभ वन्दन
🌹🙏🌹

🌹🙏आप सभी का दिन शुभ हो🙏🏻🌹

Everyone Interested candidates Please Contact-9779789083
28/06/2023

Everyone
Interested candidates Please Contact-9779789083

24/06/2023

*गाँव बेचकर शहर खरीदा, कीमत बड़ी चुकाई है।*
*जीवन के उल्लास बेच के, खरीदी हमने तन्हाई है।*
*बेचा है ईमान धरम तब, घर में शानो शौकत आई है।*
*संतोष बेच, तृष्णा खरीदी, देखो कितनी मंहगाई है।।*

बीघा बेच स्कवायर फीट खरीदा, ये कैसी सौदाई है।
संयुक्त परिवार के वट वृक्ष से टूटी, ये पीढ़ी मुरझाई है।।
*रिश्तों में है भरी चालाकी, हर बात में दिखती चतुराई है।*
कहीं गुम हो गई मिठास, जीवन से, हर जगह कड़वाहट भर आई है।।

रस्सी की बुनी खाट बेच दी, मैट्रेस ने जगह बनाई है।
अचार, मुरब्बे को धकेल कर, शो केस में सजी दवाई है।।
*माटी की सोंधी महक बेच के, रुम स्प्रे की खुशबू पाई है।*
मिट्टी का चुल्हा बेच दिया, आज गैस पे बेस्वाद सी खीर बनाई है।।

*पांच पैसे का लेमनचूस बेचा, तब कैडबरी हमने पाई है।*
*बेच दिया भोलापन अपना, फिर मक्कारी पाई है।।*
सैलून में अब बाल कट रहे, कहाँ घूमता घर- घर नाई है।
दोपहर में अम्मा के संग, गप्प मारने क्या कोई आती चाची ताई है।।

मलाई बरफ के गोले बिक गये, तब कोक की बोतल आई है।
*मिट्टी के कितने घड़े बिक गये, तब फ्रिज में ठंढक आई है ।।*
खपरैल बेच फॉल्स सीलिंग खरीदा, हमने अपनी नींद उड़ाई है।
*बरकत के कई दीये बुझा कर, रौशनी बल्बों में आई है।।*

गोबर से लिपे फर्श बेच दिये, तब टाईल्स में चमक आई है।
*देहरी से गौ माता बेची, फिर संग लेटे कुत्ते ने पूँछ हिलाई है ।।*
*बेच दिये संस्कार सभी, और खरीदी हमने बेहयाई है।*
ब्लड प्रेशर, शुगर ने तो अब, हर घर में ली अंगड़ाई है।।

*दादी नानी की कहानियां हुईं झूठी, वेब सीरीज ने जगह बनाई है।*
बहुत तनाव है जीवन में, ये कह के मम्मी ने दो पैग लगाई है।।
*खोखले हुए हैं रिश्ते सारे, नहीं बची उनमें सच्चाई है।।*

*चमक रहे हैं बदन सभी के, दिल पे जमी गहरी काई है।*

*गाँव बेच कर शहर खरीदा, कीमत बड़ी चुकाई है।।*
*जीवन के उल्लास बेच के, खरीदी हमने तन्हाई है।।*
💞🙏💞

23/06/2023

(((((((((( स्त्री का गुण ))))))))))
एक बार सत्यभामा ने श्रीकृष्ण से पूछा मैं आप को कैसी लगती हूँ ? श्रीकृष्ण ने कहा तुम मुझे नमक जैसी लगती हो।
सत्यभामा इस तुलना को सुन कर क्रुद्ध हो गयी, तुलना भी की तो किस से, आपको इस संपूर्ण विश्व में मेरी तुलना करने के लिए और कोई पदार्थ नहीं मिला।
श्रीकृष्ण ने उस वक़्त तो किसी तरह सत्यभामा को मना लिया और उनका गुस्सा शांत कर दिया।
कुछ दिन पश्चात श्रीकृष्ण ने अपने महल में एक भोज का आयोजन किया। छप्पन भोग की व्यवस्था हुई।
सर्वप्रथम आठों पटरानियों को, जिनमें पाकशास्त्र में निपुण सत्यभामा भी थी, से भोजन प्रारम्भ करने का आग्रह किया श्रीकृष्ण ने।
सत्यभामा ने पहला कौर मुँह में डाला मगर यह क्या.. सब्जी में नमक ही नहीं था।
सत्यभामा ने उस कौर को मुँह से निकाल दिया। फिर दूसरा कौर मावा-मिश्री का मुँह में डाला और फिर उसे चबाते-चबाते बुरा सा मुँह बनाया और फिर पानी की सहायता से किसी तरह मुँह से उतारा।
अब तीसरा कौर फिर कचौरी का मुँह में डाला और फिर.. आक्..थू !
तब तक सत्यभामा का पारा सातवें आसमान पर पहुँच चुका था। जोर से चीखीं.. किसने बनाई है यह रसोइ ?
सत्यभामा की आवाज सुन कर श्रीकृष्ण दौड़ते हुए सत्यभामा के पास आये और पूछा क्या हुआ देवी ?
कुछ गड़बड़ हो गयी क्या ? इतनी क्रोधित क्यों हो ? तुम्हारा चेहरा इतना तमतमा क्यूँ रहा है ? क्या हो गया ?
सत्यभामा ने कहा किसने कहा था आपको भोज का आयोजन करने को ? इस तरह बिना नमक की कोई रसोई बनती है ?
किसी वस्तु में नमक नहीं है। मीठे में शक्कर नहीं है। एक कौर नहीं खाया गया। किसी तरह से पानी की सहायता से एक कौर मावा का गले से नीचे उतारा।
श्रीकृष्ण ने बड़े भोलेपन से पूछा, जैसे कुछ हुआ ही नहीं था... तो क्या हुआ बिना नमक के ही खा लेती।
सत्यभामा फिर चीख कर बोली लगता है दिमाग फिर गया है आपका ? बिना शक्कर के मिठाई तो फिर भी खायी जा सकती है मगर बिना नमक के कोई भी नमकीन वस्तु नहीं खायी जा सकती है।
तब श्रीकृष्ण ने अपनी बालसुलभ मुस्कान के साथ कहा तब फिर उस दिन क्यों गुस्सा हो गयी थी जब मैंने तुम्हे यह कहा कि तुम मुझे नमक जितनी प्रिय हो।
अब सत्यभामा को सारी बात समझ में आ गयी की यह सारा वाकया उसे सबक सिखाने के लिए था और उस की गर्दन झुक गयी जबकि अन्य रानियाँ मुस्कुराने लगी।
कहने का तात्पर्य यह है कि स्त्री जल की तरह होती है, जिसके साथ मिलती है उसका ही गुण अपना लेती है।
स्त्री नमक की तरह होती है, जो अपना अस्तित्व मिटा कर भी अपने प्रेम-प्यार तथा आदर-सत्कार से परिवार को ऐसा बना देती है।
माला तो आप सबने देखी होगी। तरह-तरह के फूल पिरोये हुए... पर शायद ही कभी किसी ने अच्छी से अच्छी माला में "गुम" उस सूत को देखा होगा जिसने उन सुन्दर सुन्दर फूलों को एक साथ बाँध कर रखा है।
लोग तारीफ़ तो उस माला की करते हैं जो दिखाई देती है मगर तब उन्हें उस सूत की याद नहीं आती जो अगर टूट जाये तो सारे फूल इधर-उधर बिखर जाते है।
कहानी का तात्पर्य यह है कि स्त्री उस सूत की तरह होती है, जो बिना किसी चाह के, बिना किसी कामना के, बिना किसी पहचान के, अपना सर्वस्व खो कर भी किसी के जान-पहचान की मोहताज नहीं होती है...
और शायद इसीलिए दुनिया राम के पहले सीता को और श्याम के पहले राधे को याद करती है।
अपने को विलीन कर के पुरुषों को सम्पूर्ण करने की शक्ति भगवान् ने स्त्रियों को ही दी है।

Order on swiggy & zomato
23/06/2023

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